ये कविता हमारे भारतीय समाज की महिलाओं की जरुरत है ये कविता हमारे भारतीय समाज की महिलाओं की जरुरत है
फरवरी में ही इश्क़ हो जाए जरूरी है क्या फरवरी में ही इश्क़ हो जाए जरूरी है क्या
तुम कभी इंतज़ार ना करो जरूरी तो नहीं कि तुम भी मुझसे प्यार करो। तुम कभी इंतज़ार ना करो जरूरी तो नहीं कि तुम भी मुझसे प्यार करो।
जो नजरों से गिर जाये उसे उठाना नहीं। जो नजरों से गिर जाये उसे उठाना नहीं।
ज़माना क्या कहेगा ये नहीं सोचा कभी हम ने जो था दिल में हमारे वो बताना भी ज़रूरी था ज़माना क्या कहेगा ये नहीं सोचा कभी हम ने जो था दिल में हमारे वो बताना भी ज़रू...
इंतज़ार और आस इंतज़ार और आस